क्या डर गया ड्रेगन ? मोदी करेंगे मंथन
क्या डर गया ड्रेगन ? मोदी करेंगे 19 को मंथन
पूर्वी लद्दाख में 15 जून सोमवार रात गलवान घाटी में चीनी सैनिकों के साथ हिंसक झड़प में भारतीय सेना के एक कर्नल सहित 20 सैनिक शहीद हो गए. पिछले पांच दशक से भी ज्यादा समय में सबसे बड़े सैन्य टकराव के कारण क्षेत्र में सीमा पर पहले से जारी गतिरोध और भड़क गया है. सरकारी सूत्रों ने कहा है कि चीनी पक्ष के भी 43 सैनिक हताहत हुए हैं.इसी बीच 17 जून को भारत और चीन के विदेश मंत्रियों के बीच बातचीत हुई, दोनों देश तनाव कम करने को लेकर सहमति बनी लेकिन इससे पहले ही प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने लद्दाख में चीन से विवाद पर बयान जारी किया है. पीएम मोदी ने कहा है कि जिन जवानों की शहादत हुई है, वो व्यर्थ नहीं जाएगी. इसके साथ ही उन्होंने कहा कि हमें अपने जवानों पर गर्व करना चाहिए, वे मारते-मारते मरे हैं.
भारत-चीन तनाव को लेकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 19 जून को शाम 5 बजे सर्वदलीय बैठक बुलाई है. ये बैठक वीडियो कांफ्रेंसिंग के जरिए होगी. पीएम सभी पार्ट के प्रतिनिधियों से इस हालात पर चर्चा करेंगे. विभिन्न राजनीतिक दलों के अध्यक्ष इस वर्चुअल बैठक में हिस्सा लेंगे. गृह मंत्री अमित शाह ने ट्वीट कर कहा कि लद्दाख के गैलवान में हमारी मातृभूमि की रक्षा करते हुए हमारे बहादुर सैनिकों को खोने का दर्द शब्दों में बयां नहीं किया जा सकता है. राष्ट्र हमारे अमर नायकों को सलाम करता है जिन्होंने भारतीय क्षेत्र को सुरक्षित और सुरक्षित रखने के लिए अपने जीवन का बलिदान दिया. उनकी बहादुरी उनकी भूमि के प्रति उनकी प्रतिबद्धता को दर्शाती है.
सोनिया गांधी के अलावा राहुल गांधी ने भी यूट्यूब पर एक वीडियो मैसेज जारी किया. जिसमें उन्होंने चीन पर जमकर हमला बोला. साथ ही पीएम मोदी से पूछा कि वो आखिर क्यों चुप हैं. राहुल ने कहा,“2 दिन पहले हिंदुस्तान के 20 सैनिक शहीद हुए, उन्हें उनके परिवारों से छीना गया. चीन ने हमारी जमीन हड़पी है, प्रधानमंत्री जी आप चुप क्यों हैं? आप कहां छिप गए हैं, आप बाहर आइए. पूरा देश, हम सब आपके साथ खड़े हैं. बाहर आकर देश को सच्चाई बताइए, डरिए मत.” मंगलवार को जब 20 जवानों की शहद की खबर आई थी, उस समय भी कांग्रेस समेत कई विपक्षी दलों ने पीएम मोदी से सवाल पूछा था कि वह बताएं कि आखिर लद्दाख में एलएसी पर हमारे इतने जवान कैसे शहीद हो गए। एलएसी पर क्या चल रहा है। लेकिन केंद्र की मोदी सरकार किसी भी सवाल का जवाब नहीं दे रही है। यह वही पीएम मोदी हैं जो 2014 के आम चुनावों में चीन को लाल आंख दिखाने की बात कहा करते थे।
समाजवादी पार्टी (सपा) के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव ने केन्द्र सरकार को सुझाव दिया है कि भारत सरकार को सामरिक के साथ-साथ आर्थिक जवाब भी देना चाहिए. उन्होंने कहा कि चीनी कंपनियों को दिए गए ठेके तत्काल प्रभाव से निलंबित होने चाहिए.अखिलेश यादव ने बुधवार को ट्वीट कर कहा, "चीन के हिंसक व्यवहार को देखते हुए भारत सरकार को सामरिक के साथ-साथ आर्थिक जवाब भी देना चाहिए. चीनी कंपनियों को दिए गए ठेके तत्काल प्रभाव से निलंबित होने चाहिए और चीनी-आयात पर अंकुश लगाना चाहिए. सरकार के ऐसे किसी भी प्रयास में समाजवादी पार्टी देशहित में सरकार के साथ है."
गौरतलब है कि पूर्वी लद्दाख में वास्तविक नियंत्रण रेखा पर अतिक्रमण को लेकर भारत और चीन की सेनाओं के बीच जारी तनातनी सोमवार की रात हिंसक झड़प में बदल गई. इस टकराव में एक कर्नल सहित 20 भारतीय जवान शहीद हुए हैं. शहीद हुए जवान 16 बिहार रेजीमेंट हैं जबकि चार जवान पंजाब से संबधित हैं।
चीन को झटका देने की तैयारी में भारत, RRTS प्रोजेक्ट हो सकता है रद्द
चीन के खिलाफ भारत कड़े आर्थिक फैसले कर सकता है. चीनी प्रोजेक्ट को लेकर कड़ाई होगी. उन प्रोजेक्ट को रद्द किया जा सकता है, जिनमें चीनी कंपनियों ने करार हासिल किए है. इनमें मेरठ रैपिड रेल का प्रोजेक्ट भी शामिल है, जिसकी बिड चीनी कंपनी ने हासिल की है. बताया जा रहा है कि चीना सीमा पर विवाद के बाद भारत सरकार ने उन प्रोजेक्ट की समीक्षा शुरू कर दी है, जो चीनी कंपनियों को दी गई है. इसमें दिल्ली-मेरठ आरआरटीएस प्रोजेक्ट भी है. सरकार की ओर से बिड को कैंसिल करने के लिए सभी कानूनी पहलुओं को देखा जा रहा है. माना जा रहा है कि इस बिड को सरकार रद्द कर सकती है.
क्या है दिल्ली-मेरठ RRTS प्रोजेक्ट
दिल्ली-मेरठ के बीच सेमी हाई स्पीड रेल कॉरिडोर बनना है. इस प्रोजेक्ट से दिल्ली, गाजियाबाद होते हुए मेरठ से जुड़ेगी. 82.15 किलोमीटर लंबे आरआरटीएस में 68.03 किलोमीटर हिस्सा एलिवेटेड और 14.12 किलोमीटर अंडरग्राउंड होगा. इस प्रोजेक्ट से मुख्य रूप से उत्तराखंड, उत्तर प्रदेश जाने वालों को खासा फायदा होगा.
क्यों हो रहा है बवाल
दिल्ली-मेरठ आरआरटीएस प्रोजेक्ट के अंडरग्राउंड स्ट्रेच बनाने के लिए सबसे कम रकम की बोली एक चीनी कंपनी शंघाई टनल इंजीनियरिंग कंपनी लिमिटेड (STEC) ने लगाई है. एसटीईसी ने 1126 करोड़ रुपये की बोली लगाई थी. चीनी कंपनी को स्ट्रेच का काम दिए जाने का विपक्ष समेत स्वदेशी जागरण मंच विरोध कर रही है.
पांच कंपनियों ने लगाई थी बोली
दिल्ली-मेरठ RRTS कॉरिडोर में न्यू अशोक नगर से साहिबाबाद के बीच 5.6 किमी तक अंडरग्राउंड सेक्शन का निर्माण होना है. इसके लिए पांच कंपनियों ने बोली लगाई थी. चीनी कंपनी STEC ने सबसे कम 1,126 करोड़ रुपये की बोली लगाई. भारतीय कंपनी लार्सन ऐंड टूब्रो (L&T) ने 1,170 करोड़ रुपये की बोली लगाई.
कौन था गुलाम रसूल, जिसके नाम पर पड़ा गलवान घाटी का नाम
लवान घाटी में चीन और भारत के सैनिकों के बीच हिंसक झड़प हुई. इस घाटी की ऊंचाई करीब 14000 फीट है और वहां तापमान शून्य से नीचे रहता है. इस घाटी का नाम लद्दाख के रहने वाले गुलाम रसूल गलवान के नाम पर है. किवदंतियों में गुलाम रसूल को कोई डाकू तो कोई चरवाहा कहता है. लेह के चंस्पा योरतुंग सर्कुलर रोड पर आज भी गुलाम रसूल के पूर्वजों का घर है. पूर्वी लद्दाख के गलवान घाटी में चीन और भारत के सैनिक सामने टिके हैं. गलवान घाटी की ऊंचाई लगभग 14 हजार फीट है. यहां का तापमान माइनस 20 डिग्री तक गिर जाता है.घाटी की ये जगह अक्साई चिन इलाके में आती है. इसलिए चीन हमेशा यहां आंखें गड़ाये रहता है. साल 1962 से लेकर 1975 तक भारत- चीन के बीच जितने भी संघर्ष हुए उनमें गलवान घाटी ही फोकस था. 1975 के बाद अब यह साल 2020 में फिर से सुर्खियों में है.
पूर्वी लद्दाख में 15 जून सोमवार रात गलवान घाटी में चीनी सैनिकों के साथ हिंसक झड़प में भारतीय सेना के एक कर्नल सहित 20 सैनिक शहीद हो गए. पिछले पांच दशक से भी ज्यादा समय में सबसे बड़े सैन्य टकराव के कारण क्षेत्र में सीमा पर पहले से जारी गतिरोध और भड़क गया है. सरकारी सूत्रों ने कहा है कि चीनी पक्ष के भी 43 सैनिक हताहत हुए हैं.इसी बीच 17 जून को भारत और चीन के विदेश मंत्रियों के बीच बातचीत हुई, दोनों देश तनाव कम करने को लेकर सहमति बनी लेकिन इससे पहले ही प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने लद्दाख में चीन से विवाद पर बयान जारी किया है. पीएम मोदी ने कहा है कि जिन जवानों की शहादत हुई है, वो व्यर्थ नहीं जाएगी. इसके साथ ही उन्होंने कहा कि हमें अपने जवानों पर गर्व करना चाहिए, वे मारते-मारते मरे हैं.
भारत-चीन तनाव को लेकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 19 जून को शाम 5 बजे सर्वदलीय बैठक बुलाई है. ये बैठक वीडियो कांफ्रेंसिंग के जरिए होगी. पीएम सभी पार्ट के प्रतिनिधियों से इस हालात पर चर्चा करेंगे. विभिन्न राजनीतिक दलों के अध्यक्ष इस वर्चुअल बैठक में हिस्सा लेंगे. गृह मंत्री अमित शाह ने ट्वीट कर कहा कि लद्दाख के गैलवान में हमारी मातृभूमि की रक्षा करते हुए हमारे बहादुर सैनिकों को खोने का दर्द शब्दों में बयां नहीं किया जा सकता है. राष्ट्र हमारे अमर नायकों को सलाम करता है जिन्होंने भारतीय क्षेत्र को सुरक्षित और सुरक्षित रखने के लिए अपने जीवन का बलिदान दिया. उनकी बहादुरी उनकी भूमि के प्रति उनकी प्रतिबद्धता को दर्शाती है.
रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने कहा कि हमारे सैनिकों ने अनुकरणीय साहस और वीरता का प्रदर्शन किया और भारतीय सेना की सर्वोच्च परंपराओं में अपने जीवन का बलिदान दिया. भारत और चीन के बीच हुई झड़प में 20 भारतीय सैनिकों के शहीद होने की खबर पर बसपा सुप्रीमो ने ट्वीट किया है. उन्होंने लिखा कि यह पूरा घटनाक्रम दुखद है. उन्होंने कहा कि सरकार को सतर्क रहना है कि कोई भी हमारी एक इंच जमीन नहीं हड़प सकता। कांग्रेस की अंतरिम अध्यक्ष सोनिया गांधी ने कहा कि चीन की सीमा पर हमारे 20 सैनिकों की शहादत ने पूरे देश की अंतरात्मा को हिलाकर रख दिया है. मैं इन सब बहादुर वीरों को नमन करती हूं. दिल की गहराई से श्रद्धांजलि देती हूं. साथ ही प्रार्थना करती हूं कि उनके परिवार को ये दुख सहने की शक्ति दे. उन्होंने कहा कि सरकार बताए कि इस सारी स्थिति से निपटने के लिए भारत की सोच, नीति और हल क्या है? हम विश्वास दिलाते हैं कि संकट की इस घड़ी में कांग्रसे पार्टी पूरी तरह से हमारी सेना, सैनिकों, सैनिक परिवारो और सरकार के साथ है.
समाजवादी पार्टी (सपा) के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव ने केन्द्र सरकार को सुझाव दिया है कि भारत सरकार को सामरिक के साथ-साथ आर्थिक जवाब भी देना चाहिए. उन्होंने कहा कि चीनी कंपनियों को दिए गए ठेके तत्काल प्रभाव से निलंबित होने चाहिए.अखिलेश यादव ने बुधवार को ट्वीट कर कहा, "चीन के हिंसक व्यवहार को देखते हुए भारत सरकार को सामरिक के साथ-साथ आर्थिक जवाब भी देना चाहिए. चीनी कंपनियों को दिए गए ठेके तत्काल प्रभाव से निलंबित होने चाहिए और चीनी-आयात पर अंकुश लगाना चाहिए. सरकार के ऐसे किसी भी प्रयास में समाजवादी पार्टी देशहित में सरकार के साथ है."
गौरतलब है कि पूर्वी लद्दाख में वास्तविक नियंत्रण रेखा पर अतिक्रमण को लेकर भारत और चीन की सेनाओं के बीच जारी तनातनी सोमवार की रात हिंसक झड़प में बदल गई. इस टकराव में एक कर्नल सहित 20 भारतीय जवान शहीद हुए हैं. शहीद हुए जवान 16 बिहार रेजीमेंट हैं जबकि चार जवान पंजाब से संबधित हैं।
चीन को झटका देने की तैयारी में भारत, RRTS प्रोजेक्ट हो सकता है रद्द
चीन के खिलाफ भारत कड़े आर्थिक फैसले कर सकता है. चीनी प्रोजेक्ट को लेकर कड़ाई होगी. उन प्रोजेक्ट को रद्द किया जा सकता है, जिनमें चीनी कंपनियों ने करार हासिल किए है. इनमें मेरठ रैपिड रेल का प्रोजेक्ट भी शामिल है, जिसकी बिड चीनी कंपनी ने हासिल की है. बताया जा रहा है कि चीना सीमा पर विवाद के बाद भारत सरकार ने उन प्रोजेक्ट की समीक्षा शुरू कर दी है, जो चीनी कंपनियों को दी गई है. इसमें दिल्ली-मेरठ आरआरटीएस प्रोजेक्ट भी है. सरकार की ओर से बिड को कैंसिल करने के लिए सभी कानूनी पहलुओं को देखा जा रहा है. माना जा रहा है कि इस बिड को सरकार रद्द कर सकती है.
क्या है दिल्ली-मेरठ RRTS प्रोजेक्ट
दिल्ली-मेरठ के बीच सेमी हाई स्पीड रेल कॉरिडोर बनना है. इस प्रोजेक्ट से दिल्ली, गाजियाबाद होते हुए मेरठ से जुड़ेगी. 82.15 किलोमीटर लंबे आरआरटीएस में 68.03 किलोमीटर हिस्सा एलिवेटेड और 14.12 किलोमीटर अंडरग्राउंड होगा. इस प्रोजेक्ट से मुख्य रूप से उत्तराखंड, उत्तर प्रदेश जाने वालों को खासा फायदा होगा.
क्यों हो रहा है बवाल
दिल्ली-मेरठ आरआरटीएस प्रोजेक्ट के अंडरग्राउंड स्ट्रेच बनाने के लिए सबसे कम रकम की बोली एक चीनी कंपनी शंघाई टनल इंजीनियरिंग कंपनी लिमिटेड (STEC) ने लगाई है. एसटीईसी ने 1126 करोड़ रुपये की बोली लगाई थी. चीनी कंपनी को स्ट्रेच का काम दिए जाने का विपक्ष समेत स्वदेशी जागरण मंच विरोध कर रही है.
पांच कंपनियों ने लगाई थी बोली
दिल्ली-मेरठ RRTS कॉरिडोर में न्यू अशोक नगर से साहिबाबाद के बीच 5.6 किमी तक अंडरग्राउंड सेक्शन का निर्माण होना है. इसके लिए पांच कंपनियों ने बोली लगाई थी. चीनी कंपनी STEC ने सबसे कम 1,126 करोड़ रुपये की बोली लगाई. भारतीय कंपनी लार्सन ऐंड टूब्रो (L&T) ने 1,170 करोड़ रुपये की बोली लगाई.
कौन था गुलाम रसूल, जिसके नाम पर पड़ा गलवान घाटी का नाम
लवान घाटी में चीन और भारत के सैनिकों के बीच हिंसक झड़प हुई. इस घाटी की ऊंचाई करीब 14000 फीट है और वहां तापमान शून्य से नीचे रहता है. इस घाटी का नाम लद्दाख के रहने वाले गुलाम रसूल गलवान के नाम पर है. किवदंतियों में गुलाम रसूल को कोई डाकू तो कोई चरवाहा कहता है. लेह के चंस्पा योरतुंग सर्कुलर रोड पर आज भी गुलाम रसूल के पूर्वजों का घर है. पूर्वी लद्दाख के गलवान घाटी में चीन और भारत के सैनिक सामने टिके हैं. गलवान घाटी की ऊंचाई लगभग 14 हजार फीट है. यहां का तापमान माइनस 20 डिग्री तक गिर जाता है.घाटी की ये जगह अक्साई चिन इलाके में आती है. इसलिए चीन हमेशा यहां आंखें गड़ाये रहता है. साल 1962 से लेकर 1975 तक भारत- चीन के बीच जितने भी संघर्ष हुए उनमें गलवान घाटी ही फोकस था. 1975 के बाद अब यह साल 2020 में फिर से सुर्खियों में है.
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